दीदी की चुदाई की घर पर – Didi Sex Stories

Didi Sex Stories – Desi Sex Kahani: सभी लंड धारियों को मेरा लंडवत नमस्कार और चूत की मल्लिकाओं की चूत में उंगली करते हुए नमस्कार। हेलो रीडर्स, वैओन को प्रणाम, और लड़कियो को मेरा प्यार. केसे हो सब. स्टोरी पर आता हूँ. मेरा नाम नीरज, एज 22,मेरा लंड बड़ा न काफ़ी मोटा है.

ये कहानी जिस पर है वो मेरी बुआ हे, एज 26 हमलोग बूआको दीदी बुलाते हैं, दीदी की नाम झिमी, उसकी बूब्स काफ़ी बड़े हैं, 36,32,40 साइज़ है उसकी न गान्ड तो साइज़ से पता चलता है पर गान्ड के बारे मे जितना भी कहूँ कम है.

मे चाहता हूँ की उसकी गान्ड हमेशा मेरा मूह के उपर रहे और मे उसे चूमता रहूं, सूंगता रहूं, चाटता रहूं, उसकी मॅरेज हो चुकी है, एक छोटी बच्ची ब है दो साल की..

उसका पति एक कंपनी मे जॉब करता है, हुमारे जॉइंट फॅमिली है इसलिए बहुत बड़ा फॅमिली है, मेरी चार बुआ है, और हमारे फॅमिली मे 22 लोग हैं इन टोटल, तो घर मे हमेशा शोर होता है काफ़ी लोगो को हमेशा लगता है जेसे कोई फंक्षन हो,

अब कहानी पे आता हूँ, बचपन से आज तक मेरे और मेरी झिमीदीदी का जोड़ी मस्त रहा है घर मे, हम एक साथ रहते हैं हमेशा, झिमीदीदी हॉर्नी टाइप की है मतलब हमेशा मेरे साथ नेगेटिव बातें, मे पढ़ाई मे फर्स्ट सो मे कोई स्टेप्स नहीं लेता था मेरा काफ़ी अच्छा रेस्पेक्ट है.

वो बचपन मे मेरा नुनु पकड़ लेती थी न उसकी चूत पर मेरा हाथ रख देती थी पर ये सब बंद हो गया उसकी पीरियड्स आने के बाद, मे कुच्छ नहीं करता था पर मुझे अच्छा लगता था, न हमारे साथ रहना इतना हुआ मे बाहर पढ़ता था इसलिए,

बात एक साल पहले की है, उसकी शादी को 1 साल हो चुका था न उसकी एक बेटी ब हो गयी थी, वो हमारे घर आई थी कुच्छ दिन केलिए, मे उस वक्त घर मे था.

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आते ही पहले दिन ( वो रात को आई थी करीब 7) न घर मे बच्चे, न लग भाग सब सीरियल्स देख रहे थे टीवी रूम मे वो सब से मिली न कुच्छ देर वहाँ बैठी बात चित की, उसकी बेटी को किसी और को पकड़ा दिया उसके बाद वो फ्रेश होने केलिए कहा और नेक्स्ट रूम मे आ गई, मे उसकी ड्रेस चेंज देखने केलिए बाहर आ गया.

मे उसे हमेशा वोही नज़र से देखता था, मे तो अच्छा लड़का हूँ सबके नज़रो मे तो उसे कुच्छ पता नहीं था, वो नेक्स्ट रूम आई.( रूम पूरा खुला था उसने लाइट्स ऑन की न स्टांड फ़ान ब, मे घर के बाहर कुच्छ दूरी पर एक कोने मे था, वहाँ पर अंधेरा था तो उसे कुच्छ पता नहीं चला).

उसने अपनी सारी निकल के फेक दी, ब्लाउस ब उतार दी, ऐसे उतार रही थी जेसे अंदर कुच्छ होगआया था ( काफ़ी गर्मी थी उसमे न वो बहुत दूर से आई थी).

अपने पेटिकोट के नाडा व खोल दी न वाइट कलर की पनटी को अपनी नी तक कर दी ( वो बिल्कुल फ़ान के सामने खड़ी थी तो हवा उसकी चूत को लग रहा था, उसकी बदन से बहुत पसीने निकल रहे थे) वो फिर अपने ब्रा निकाल कर नीचे फेक दी, मे तो जेसे स्वर्ग मे था क्या नज़ारा था.

मेरी स्वर्ग की पारी नंगी होके अपनी चूत को फ़ान से ठंडी कर रही थी, जेसे उसकी अंदर जान आ गयी हो ऐसे ही आँख बंद करके हवा ले रही थी फिर उसने अपनी बड़े बड़े बूब्स को दोनो हतों से पकड़ कर अलग किया न फन के सामने रखी, पनटी नी तक थी तो उसने उसे पैर को उपर नीचे करके निकल दी.

फिर उसने पीछे मूड के गान्ड को ब हवा दिलवाई, गान्ड को दो हाथ से पकड़ कर अलग की न च्छेद पर हवा दिलवा रही थी, क्या नज़ारा था मेरी चड्डी फटने वाला था तभी एक चपल की आवाज़ आई लगा कोई आ रहा है मे चला वहाँ से न झिमीदीदी ब सडन्ली टवल लपेट कर बातरूम चली गई.

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रात को करीब 10.30 मेकोई खा रहा था तो कोई और कुच्छ, झिमीदीदी ख़ाके सोने आई( रूम मे लाइट्स ऑन थी न डोर स्क्रीन ब लगा हुआ था,मे तो उसे हमेशा फॉलो करता हूँ चुप चुप के) झिमीदीदी ने दरवाजा एक साइड बंद की न एक कॉर्नर चली गई, मुझे लगा कुच्छ कर रही है ये..

मे हिम्मत करके अंदर चला गया” झिमीदीदी कहाँ हो बोलके”( मुझे सब अच्छे सोचते हैं तो मे चला जाता था कहीं भी) मेरी आँखे बड़े हो गये न मे देखता ही रह गया.

झिमी दीदी ने नाइटी उपर उठाया है न पनटी नीचे करके चूत के साइड जांघों के साइड पर कुच्छ लगा रही थी (आयंटमेंट या और कुच्छ शायद गर्मी की वजह से कुच्छ हो गया था वहाँ), फूली हुई चूत उपर बाल थे गोरे गोरे जांघों के बीच वो सुंदरता को बढ़ा रहे थे.

झिमीदीदी – क्यों आए हो यहाँ( चिल्लाके) क्या कम है, मेरा ध्यान नहीं हट रहा था चूत से, तो झिमीदीदी नीचे देखी न अपनी नाइटी नीचे कर ली.

झिमीदीदी – क्या हुआ बोलो.

मै – मुझे मिलना था, मैं ठीक से मिला ब नहीं था तुम्हे., ( मै ये सोचके गया था)

झिमीदीदी – आजा बैठ यहाँ. मुझे बिठाई अपने पास और बोली तेरा एग्ज़ॅम्स केसे गये??

मैं – ठीक ठाक,,दीदी तू ये क्या कर रही थी,

झिमीदीदी – कुच्छ नहीं, अरे गर्मी की वजह से प्राइवेट पार्ट्स मे थोड़ा कुच्छ हो गया है, छोड़ तू ये सब सवाल मत कर

और बहुत सारी बाते हुई., पर झिमीदीदी ने बचपन जेसी नेगेटिव बाते नहीं की अभी ब, पूरा छोड़ दी थी उसकी पीरियड्स आने के बाद,

मे गुड नाइट बोलके आ गया

उस दिन चार बार मुठ मारा, मेरे दिमाग मे झिमीदीदी थी, सोच लिया की जेसे ब करके मे स्टेप्स लूँगा चोदने केलिए उसे.,

झिमीदीदी के पति चले गये अगले दिन, उसकी बेटी को मे हमेशा पकड़ता था न उसे देने जाता था, देने के टाइम मे अपनी हाथ उसकी बूब्स पर लगा के थोड़ा दबा देता था..

पहले पहले उसने नोटीस नहीं किया बाद मे करने लगी न मुझे एक असचर्या भरी नज़रो से देखती थी, उस दिन दोपहर को हम ( मैं, बच्चे लोग न दो बुआ) टीवी रूम मे थे फ्लोर पर सब टीवी देख रहे थे..

देखते देखते सो गया ( दोपहर को सारे सोते थे खाने के बाद हमारे घर मे), मेरे साइड मे झिमीदीदी थी उसकी बेटी को ब सुला दिया था उसने, उन्होने नाइटी पहनी थी, उपर को मूह करके सोई थी..

उसकी जिस्म की पूरी शेप मुझे दिख रही थी बूब्स उपर नीचे हो रहे थे साँस ले रही थी वो इसलिए न चूत की ब शेप आ रही थी पूरा, थोड़ा उपर हुई थी उस जगह, मेरा ध्यान वहाँ से हटा नही, मन किया हाथ लगाने को तो हाथ रख दिया उसके उपर न थोड़ा प्रेस ब किया, उपर बूब्स पर ब हाथ रखा धीरे..

वो ब्रा पहनी थी अंदर स्टिल उसकी निपल थोड़ा थोड़ा शेप बना रहा था तो उसको उंगली से थोड़ा प्रेस किया, शायद उसे ये सब पता चल गया था पर वो कुच्छ नहीं कही सोने की नाटक की..

तभी ओर एक बुआ उठ पड़ी न कहा” क्या हुआ बता अब तक, ये हेरोयिन ऐसे रो क्यूँ रही है”” (टीवी पे कोई पिक्चर चल रही थी) तो मेने अड्जस्ट की कुच्छ बोलके., शाम को मैं फोन पर कुच्छ कर रहा था टेरेस पर, झिमीदीदी आके पास मे बैठी

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झिमीदीदी – ” कोई गफ़ है? तू तो बड़ा हो गया है रे मेरे छाती पर बाल को हाथ लगाके”(गर्मी थी तो मे सिर्फ़ हाफ पॅंट मे था)

मैं – नहीं दीदी, क्यों, ऐसे सवाल क्यों कर रही हो.

झिमीदीदी – ऐसे ही पुच्छ रही थी, कहके मेरे जांघों के उपर हाथ रखी, न सडन्ली नीचे से पॅंट के अंदर हाथ डाल दी मेरे लंड को पकड़ कर ” तेरे नुनु केसा है देखें ज़रा “,

मेरा तो हालत बुरा हो गया, उसकी हाथ लगते ही लंड सडन्ली खड़ा हो गया पूरा रोड जेसे हो गया.,

मेरी बोलती बंद, झिमीदीदी – क्या रे तेरा इतना बड़ा है उई मा, ये तो मेरे पति का डबल है, मोटा ब इतना केसे हुआअ!!!!!

मेरे कानों के पास आके बोली – तू दोपहर को जो कर रहा था सब पता है मुझे.,

तब मे घबरा गया, झिमीदीदी – आरे मेरे से अब तू फ्री हो सकता है, उसने ये कहके मेरा लंड को हिलाया ज़ोर ज़ोर से., ( हमारे घर मे कोई ना कोई आ जाता है इसलिए नो प्राइवेट प्लेस, सो वो चारो ओर देख रही थी न मेरा लंड हिला रही थी).

मे तो जन्नत मे था, मुझे समझ मे नहीं आ रहा था क्या जवाब दूं, क्या रिस्क करू., हिलाके मेरा स्पर्म निकाल दी., उठके एक स्माइल दी न चारो ओर देख के मेरे लिप्सस्स पर एक किस दिया, मे तो पूरा स्टॅच्यू था, क्या हुआ अभी समझ मे नहीं आया.

फिर दीदी ने गान्ड हिला हिला के चली, न पिच्चे मूड के देखती ब थी खड़ी हो के अपनी नाइटी पिच्चे से उपर कर के गान्ड पनटी के उपर दिखाके चली., मे तो खुश हो गया पूरा, मे असचर्या था इसलिए की इतनी जल्दी ये सब हो जाएगा पता नहीं था, मुझे विश्वास नहीं हो रहा था.

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उस रात जब सब सीरियल्स देख रहे थे तब मुझे इशारा करके बाहर बुलाइ, न नेक्स्ट रूम मे ले जाके मुझे पागलों की तरह किस करने लगी, मैं ब साथ दे रहा था नाइटी के उपर दो हाथ से उसकी बूब्स दबा रहा था, न जीब को उसकी मूह मे डालके किस कर रहा था, न मेरा हाथ उसकी गान्ड को चला गया.

नाइटी के उपर गान्ड को मसल रहा था न उसकी चूत पर जो की नाइटी के अंदर थी उसपे लंड रगड़ रहा था गान्ड को अपने ओर दबा रहा था, ( ये सब हम खड़े होके नेक्स्ट रूम मे कर रहे थे,लाइट्स ऑफ थी), किसीकि आने की आवाज़ आई तो हम सडन्ली निकल आए उस रूम से..

रात मे ही हुमारे घर मे पति पत्नी ठीक से कर सकते है जो करना है पर प्राइवसी दिन मे बिल्कुल नही., .उस दिन और कुच्छ नहीं हो पाया जब वो ख़ाके जा रही थी डिन्नर मैं उसके पिच्चे पिच्चे जाके उसकी गान्ड पर हाथ लगा दी ओर उसने पिच्चे हाथ करके मेरे खड़े हुए लंड को ज़ोर से पकड़ के मसल दी.

फिर वो सोने चली गयी ( लड़की लोग जो अनमॅरीड है उसके साथ सोती थी ये, घर मे हमारे इतने ज़्यादे नहीं थे, अनमॅरीड लड़के लोग एक साथ सोते थे).

नेक्स्ट दिन सुबह मैने झिमीदीदी को देख के इशारा किया की क्या करें?? लंड मेरा रो रहा है,तड़प रहा है तेरी जिस्म की खुश्बू पाने केलिए, कब चोदुन्गा!!???, वो मुस्कुरई..

करीब 10.30 बजे मैने ब्रेक फास्ट करके ढूंड रहा था झिमीदीदी को( इस्स टाइम पर घर थोड़ा खाली होता है, बच्चे लोग बाहर), झिमीदीदी उनकी रूम मे एक कोने मे अपने बेटी को दूध पीला रही थी..

मे चारों ओर देख के रूम मे चला गया, झिमीदीदी थोड़ा घबरा गयी, मे उसके सामने जाके खड़ा हो के कहा ” मुझे ब दूध पीना है”.

झिमीदीदी – (मेरे लंड को हाफ पॅंट उपर पकड़ कर थोड़ा मस्ल दिया और बोली) आजा बैठ, लेकिन तू यहाँ से जल्दी जाएगा, कोई हमे इस वक्त देखेगा यहाँ तो मर जाएँगे हम., क्यूंकी मे इससे दूध पीला रही हूँ, मेरा बूब्स बाहर है न तू क्या कर रहा है यहाँ, ये गड़बड़ है, चल जल्दी कर जो करना है.

वो मेरा लंड को पकड़ी थी वैसे ही न सहला रही थी उपर से, मेरा तो खड़ा हो गया था पूरा, उसने अपने बेटी का मूह थोड़ा हटाया न कहा””” ले चूस ले”, मैने उसकी ये बात सुनके जल्द ही उसकी बूब्स को मु मे ले लिया निपल को चूस्ता रहा न दूसरी हाथ से उसकी दूसरी बूब्स को दबाया, फिर उसने कहा चल अब, जल्दी कर.

फिर उसने मुझे कहा – मुना( दीदी मुझे मुना बुलाती थी) देख कोई आ जाएगे, जा अब.

मे गुसा हो के उठा तो उसने मेरा लंड पकड़ के कहा – मे हूँ, कहीं नहीं जा रही हूँ, जब जब मौका मिलेगा मे तेरे साथ हूँ रे बाबा एसा क्यूँ होता है( मेरा लंड पकड़ के, हाफ पॅंट के नीचे से हाथ डालके चड्डी के उपर से पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से सहलाई), जा अब.

दोपहर को मैने वही किया जो पिच्छले दिन किया,हम सारे टीवी रूम मे थे.अब बिना डरे मे उसकी नाइटी के अंदर हाथ डाल दिया न ब्रा के उपर बूब्स दबाया, उसने उठके चारो ओर देखा, मेरे लंड पकड़ी पॅंट के उपर से, (( सारे एक तरफ थे मे और झिमीदीदी एंड मे,हम टोटल 5 थे हमे मिलाके बाकी तीन पूरे सो रहे थे, , मे दीवार को लगा हुआ था मेरे बगल मे झिमीदीदी,रूम बंद था अंदर से)) , ((( अब धीरे धीरे कान मे बोल रही थी)))::

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झिमीदीदी – आज बहुत कुच्छ हो पाएगा, धीरे से बोली, (( मेरे तरफ गान्ड करी न पिच्चे की नाइटी उपर कर ली पनटी थोड़ा नीचे कर ली))

झिमीदीदी – आज जितना हो पाएगा चोदेगा तू मुझे,, धीरे से बोली कान मे(( मेरे लंड मसल रही थी))

झिमीदीदी – चल अब नीचे हो जा,

मे समझ नहीं पाया

मैं – क्या??

झिमीदीदी – मुना नीचे हो के मेरी गान्ड को चाट, मेरी चूत चाट, तू कुच्छ नहीं जानता है क्या.,

मैं – दीदी तुम तो मेरी गुरु हो, जब तक सिख़ाओगि नहीं मे केसे जानूंगा,

झिमीदीदी – चल चल जल्दी कर,

मे नीचे हो के दीदी की गान्ड को चाटा पहले, फिर छेद मे मेरा मुह डाल के चाटा, सूँघा क्या स्वाद था, दीदी अपनी गांद दबा रही थी मेरे मुह पर न हिला रही थी गान्ड को, मे तो पागलों की तरह चाट रहा था, चूत के अंदर जीब डाल दिया जितना हो पाया, झिमीदीदी उपर उछल रही थी,

तभी अचानक किसीने डोर नॉक किया, गुस्सा होके हमलोग ठीक हुए जल्दी, दीदी जाके खोली, दीदी के अंकल आए थे, सब उठके वहाँ जा रहे थे, बात चीत चली, दीदी और मे कुच्छ देर बाद बाते कर रहे थे केसे क्या करें.,

झिमीदीदी – अरे मे तुझसे ब ज़्यादा प्यासी हूँ तेरे लंड को मैने बचपन से चाहा है,

मैं – क्या शादी के बाद ब?

झिमीदीदी – अरे वो कुच्छ नहीं करता है काम के बाद आके सो जाता है, मे सोच रही थी तुझे केसे पटाउँ, पर तू खुद आगया, हम दोनो को मिलना था,

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झिमीदीदी – अरे मे जा रही हूँ कल, अपने घर

मैं – कुच्छ दिन और रुक जाओ ना

झिमीदीदी – अरे वो खाना बनाने केलिए उसके पास कोई नहीं है, (( कंपनी के क़ुअटेर्स मे रहती है मेरी दीदी))

मैं – निराश हो के, मेरा क्या होगा

झिमीदीदी – तेरे लिए एक खुश खबर सुनौउ

मैं – तेरी जिस्म मिल रही है तो बता नहीं तो मत बोल,

झिमीदीदी– अरे मेरा पति 5 दिन के बाद जा रहा है कंपनी के काम से बाहर 7 दिन के लिए, मे तुझे बुला लूँगी, अब खुश हे ना, मेरी चूत फाड़ देना और गान्ड ब, जो मर्ज़ी करना, मे तो तेरी हूँ.,

मैं – खुशी से नाचने लगा, दीदी आइ लव यू सो मच दीदी कल से 5 दिन हम वीडियो कॉल करेंगे, तेरा तो वहाँ कोई नहीं है पति कंपनी जाने के बाद, चूत गान्ड दूध सबकी दर्शन चाहिए मुझे हमेशा.,

झिमीदीदी – ओके,

मेरा लंड को चूसने के लिए दीदी एक जगह ढूँढ ली न मेरा लंड को एक रंडी की तारह चूसी सारा पानी पी ली,

नेक्स्ट पार्ट मे बतौँगा केसे मैने चोदा दीदी को,

कहानी कैसी लगी जरूर बताये, मेरी email id है storyboy2121@gmail.com